मीठै पान की पीक रचै लीक दौउ
मीठै पान की पीक रचै लीक दौउ अधरा,लाली ऐसी जासौ गुलाब दल लजाय गयौ।
नैनन कै सैनन तै छैडे जई पिय प्यारी,लाली बढी लाली मुख कनक सुहाय रह्यौ।
बरौनि झुकाय नाय ठाय नैन कौर देखि,कामहु पै काम मनौ शर निज चलाय दयौ।
बाढि रस गाढि पिय लालसा अधीर तई,उघाडि जई पौन रैख वक्ष कौ दिखाय गयौ।
भूलै जग अघ सखी सहेली सौ घिरै भूलै,मधुप बनै पिय प्यारी खैच उर लगाय लयौ।
बरसी सरस रस धार पिय प्यारी पै ज्यौ,त्यौ उर सखी "प्यारी" रस तै न्हाय गयौ।
Comments
Post a Comment