पीबत दूध

पीबत दूध
पीबत निरालौ ढंग दूध लाला।
छोटो सो लाल,अंगना ठाडी गैय्या देखी।
नैन बचाय मैय्या,आय गैय्या नीकौ बैठी।
लगाय थन मुहा,दूध ऐसौ पिवनौ लागै।
भान नाय मैय्या,कदै झौरै आवन आगै।
कहि लाला कहा,तुव करियो रै भौरै।
तोय दूध कमी,जोय गैय्यन नीको पीवे।
नाय रे लाला,काय गैय्यन कू  सतावे।
कहा तू बछरा,बता पाछे जनम होय।
ऐसी बाल लीला,कदै दरस प्यारी पाय।

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