देखि भाँति सबहु रमण मनाए।
रोईकै देखि सारी सारी रैनन,देखि रोए सगरौ दिवस बिताए।
बिनती करिकै देखि गिरी चरणा,जोडिकै कर देखि गुहार लगाए।
भाग जगत सौ छाड सब देखि,देखि जग पुनि फैरत लौटाए।
छाडिकै देखि उन कर डोरी,देख लई मति निज की दौराए।
हसि देखि उर दाब प्रेम पीरा,कहिकै देखि उनतै पीरा बिलखाए।
देखि रूठिकै देखि मै मनाकै,उलाहनै तानै देके देखि हाय।
एक चलि ना होई नाही सुनवाई,"प्यारी"परे अब तो प्राण गमाए।
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