काहे चहकत री चटकानी
काहै चहकत री चटकानि।
जानत न अरी लग्यौ है फागुन,तापै री मोरै पीय की न आनी।
जई चहकत तू अरी मौर अंगना,छन लग्यौ करी पी अगवानी।
निज कह री कहा पई तू ऐसौ,जोई हरष सौ न फूली समानी।
गयौ प्रीतम परदेश क्या आयौ,याई जाय रह्यी पी सौ मिलानि।
ऐ री सखी मौय हरष री तैरौ,कौऊ कौ तौपिय प्रीत निभानी।
देय आशीष री अबिके फाग मै,"प्यारी" पए कछु प्रीत निशानी।
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