रमण जु मेघ देख हरषाए।

रमण जु मेघ देख हरषाए।
उमड घुमड जई गरजत देखे,चपला से दिन्है दसन दिखाए।
मोर पखा धरै नाचत मोर सौ,ग्रीवा रहै मोर भाँति मटकाए।
श्यामल घन तन श्यामल इनकौ,लगै नभ दर्पण इन दरशाए।
हरष देख इन हरषित "प्यारी",दैखे सदा लाल योई मुस्काए।

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