मोरे श्याम नटखट

मौरे श्याम नटखट नाहि बैय्या मरोरो।
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कोमला कराई मौरि,नाही कीजौ जोरा जोरि,लचक खायि जाय मोरि दीजौ बाँह छोरो।
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चितवनि अतिहि टेढी,उर गति देखिकै बाढि,मद-भरै नैनो से मौपे ना जाल नेह का गेरो।
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बैरी कैसी जे- निगोरी,जो धरी अधर बाँस पोरि,हाय सौत दाहै हिय अबहि ह्यौ सम्मुख तोरो।
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सखियनि हसी करेगी,सर-दोष सास नन्द धरेगी,ऐजी बीच गाम ऐसो मेरौ मारग ना घेरो।
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अति-घिरति निशि घनेरी,भई पहलोई जावन अबेरी,तापै तुम्हु रार करिकै ना फैरावो बखेरो।
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सुभाग-भाग पावै जोई,गोपिन सर माथ नोई,कबहु तो ऐसौ प्रेम-रार "प्यारी" संग खेरो।

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