सब तौर

सब तौर
माधवा! जो कछु है सब तौर।
भरा कलुष कल्मष ह्रदय,गादला ज्यौ हौ पाणी।
मैला कुचैला तन ही तिहारौ,तिहारी कटीली हौ बाणी।
भाव कुभाव विभाव आपकौ,चंचल चित्त भयौ तोय।
तिहारौ मान अपमान होहियै,हँसन रोवन सब होय।
आवन जावन श्वास तिहारौ,अटक्यौ साँस तिहारी।
अधमता कुटिलता भरै रहिहै प्रभु,करै अर्पण जै ही प्यारी।

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