म्हारा घर आवौ रमण गुपाल जी।
म्हारा घर आवौ रमण गुपाल जी।
म्हारै नैननि थकि गये बाट जोहै,नैना दरस दिखावौ नंदलाल जी।
जग हाँसै प्रेम म्हारै थारै पै,कहै मूरत ना बोलै किसी हाल जी।
काहै निर्मोही संग तैने प्रीत करी,करै मौ सौ जिवरौ सवाल जी।
नाही आवौ तौ लै जावौ मोहै संग,"प्यारी" लै जावौ जग सौ निकाल जी।
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