रंग खैले रैन

रंग खैले रैन सुखदाई।
परै पिय कबहु रीझ प्यारी पै,कदि रीझ प्यारी ढुरि जाई।
नैनन सौ रस आनन कदि पीवै,रस अधर पीवन कदि आई।
छूवै अंग अंग अनंग करै केलि,रहै रीते भरै तऊ नाई।
रैन दिवस नित खेल येई प्यारै,"प्यारी" खैले दोउ यौ सदाई।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया