नाज भरी खरी सेज के पास।
नाज भरी खरी सेज के पास।
परी संग पिय सेज पे चूनर,झरै कुसुमनि लर करिकै विलास।
कर विनय प्रेम कौ लाए सैजा,देखि सैनन जब बाढि ओर प्यास।
युगन कलप सम पल व्याकुलता,मिले अंगनि अरू एक भई श्वास।
नील पीत द्युति हरितई होई,"प्यारी" खोई सेज दोउ रंग प्रकाश।
Comments
Post a Comment