हिय अरस-परस भए वपु वोई।

हिय अरस-परस भए वपु वोई।
बाम भाग सजै प्रीतम प्यारे,दाई ओरि सेज परी प्यारी सोई।
रस प्यासी भई आजु प्यारी,रस प्यावन चौप पिय उर होई।
भाँति गाढि पिय लिपटावन की,चौप लिपटन की पिय जगी जोरि।
भूषण बसन सब पहलोई जैसे,गए बदलनि दोउन के हिय होरी।
भेष आज लौ पलटत देखे,"प्यारी" देखे पलट आजु हिय कोई।

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