मिलित तनु मनु अति नीके
मिलित तनु मनु अति नीके।
अद्भुद सिंगार आध नर नार,चढै नैन सुरति रस पी-कै।
कोमल अधर अरूणित अपर,विस्मित भए गए भीजै।
का मे कोऊ जानत नऊ,यौ लाल लाडिली एक दीखै।
बसत रहत सदा उर दोउन,होई एक प्राण एक जी-कै।
"प्यारी" शरण चरण धर लीजौ,सुख हेत रहू तुम्ही-के।
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