मन आंगन काहे सुनो सुनो

मन आँगन काहै सूनौ सूनौ।
काहै देहि गठरी बोझ की,लगै साँसन कंटक दूनौ दूनौ।
नैननि खाली काहै जल तै,हिय उमगि आवै काहै रोनौ।
शशि रमणा मौरे काहै छुपिहै,काहै आवै नाही मौरी पूनौ।
साँझ भई पिय कितहु उलझै,काहै तरसाई " प्यारी" नेकसौ छूनौ।

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