मध्य शोभा

मध्यै शौभा
देखि मध्यै शोभा अनोखी।
एको ओर ललिते एको ओर राधिके,मध्ये श्याम होयी।
दुई कर रखिहै दुईन काधै,लटपटी चाल भयी।
धरत पग डोलिहै इत्त उत्त,जानि जानि ढुरि पयी।
हसत बोलत बैन मीठे,दुई पकरि चिबुक लयी।
रसराज रस लीला दैखिहौ,करी दुई संग प्रीत लयी।
दरस छबि प्यारी अनौखै पायी,ढुरि चरणन मा ही गयी।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया