प्रीतम ढूंढत फिरत अकुलाय
प्रीतम ढूंढत फिरत अकुलाय ।
कित हो मेरी प्रिया किशोरी जु , कहा छिपि तुम जाय ।
कुँज निकुँज माहिं खोजत प्यारें, राधा राधा टेर लगाय ।
पुष्प - पुष्प पात पातन में , देखी प्यारी मुख भरमाय ।
श्रीबृंदाबन कण कण में , नित्य श्रीराधा राधा समाय ।
प्रियतम संग प्यारी जु विहरें , नित माधुर्य रस बरसाय ।
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