लै गयो रमणा सबही

लै ग्यौ रमणा,सबही लै ग्यौ चुराए।
नीर पीर बिरहा ब्याकुलता,ऐजी लैग्यौ , बदन रंग उड़ाए।
मिलन हसन कुंजन धीरजता,जेई भाग्यौ , आस डोरि तुड़वाए।
निंदिया बतिया संगनि सखियाँ,गयौ आपहु , लैग्यौ सुपन सजाए।
"प्यारी" हारी ऐसौई चिंता,लैके सबई , काहै प्राण बचाए।

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