द्रव वपु जोरि
द्रव वपु जोरि जानौ रसरानी।
कुंवर बरण श्याम धारै बाहिर,धारै भीतर शीतल सम ब्रजरानी।
वेगित अति दीखै सम लाला , रहै अंतर भांति धीरज धरै लाली।
विची बहु बिध मिलन लालसौ,लली शांत कल्लोल जई मान ठानी।
केलि छकै जई एक रूपहौ,"प्यारी" ताई कहाई जमुनै महारानी।
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