गल फूल माल लाल पडी लली लाल कै

गल फूल माल लाल पडी लली लाल कै,नैनौ मे करै बतरावनी रस की।

खरै खरै परै दौऊ ढुरै जात आप पै,कहु कहा बात इन मधुर विंहस की।

कर पर धरै कर मिलै तरू बेल सौ,उमगि परि हौ ज्यौ सरिता सु-रस की।

लटकि लटा गिरी बरौनि हया भार तै,झुक लाल दैखै बाढि चौप दरस की।

"प्यारी" कहै कहाँ लौ बात लली लाल कौ,प्रेम राज भीजै इन प्रेम दरसती।

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