बढ्यो तरसाई
बड्यौ तरसाई
पिया मोय बड्यौ तरसाई जी।
कल कल करे आवै कल नाही,प्रीत झूठी धराई जी।
जानै न पिय कबहु मोय अपनौ,हित हमरे न आई जी।
तब काहै नैन लगाय हम सौ,काहै लगन लगाई जी।
आप तौ बैठ्यौ बन ठन ठाकुर,मौ पै करी ठकुराई जी।
आध अधूरौ ब्याह रचायौ,कैसौ रसम निभाई जी।
गिरधारी नेक आय देखियौ,प्यारी काय ठुकराई जी।
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