गिरधारी मोहे
गिरधारी मोहे , कदिहु दूजौ ना भाय।
उर बसी साँवल छब नाय हटिहै,संगहु याकै,छबी कोउ दूजी ना आय।
कही कदि भेजिहौ तऊ जावू तबई ,जबहु संगै, प्यारौ मेरेहु जाय।
बाँधी बँधी रहै तुम संगै डोरी , बँधिहै ऐसै , तोरे ना तोरी जाय।
"प्यारी" तिहारी होयी तुम्हु हो याके,दूजोई नाता,उर कदि ना लाय।
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