मोसो रुठयो
मौसौ रूठ्यौ च्यौ लाल रमण जु।
मुख मौडिकै च्यौ बैठे प्यारे,ठानै बैठ्यै च्यौ संग तजन कू।
बौल्यौ ना तुव नाय म्हारी सुनिहौ,मौकू छाडि पूछ्यौ हाल सबन कू।
मान्यू कही अति उल्टौ सूधौ,जानि निज धन कह्यौ तबन तू।
कहि जई तबई सुनिकै हाँसै,दीन्ही बढत तौ कहन सुनन कू।
भूली बिसरी लैनी देनी कहनी,नेक आवौ जी उर बरणन कू।
श्रृवण धरी कर आगैहु बैठ्यी,आवौ बिसारी "प्यारी" छमा करन सूं।
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