बिहरत कूल कालिंदी रसिकवर
(पद का हिंदी भाव भी संग दिया है)
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बिहरत कूल कालिंदी रसिकबर।
कृष्ण पक्ष बिनहु शशि अम्बर,धरनि विहरै सखिन शशिशिखर।
निरव तट रमणीय हित रमणौ , लटकत चलिहै आपस मनहर।
चूनर दाँए लटकत पट बामई। , पदचिन्ह बनिहै रेख रेतीपर।
सुमनि वेणि श्रृवणहु हिरै झरिहै , पाछित चाप चलिहै पूजीकर।
किंकणी घंटिका नुपुरही धरै चुप , चुपहु सेवित यमुनै कुमुदवर।
"प्यारी" बंधै गति चलै सहजई , लुटावत लूटत रसहु सबपर।
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