बैरागन होई

बैरागन होई
बैरागन मै बैरागन होई।
बैराग लगा गिरधर का मोय,सुधि जग अघ की बिसराई।
जोग भोग नाय जानू कौन हौ,बिराह बैरागन मोय बनाई।
बंधु सखा पिय प्रितम प्यारौ,नेह सब संगै इन संग लगाई।
नैन बसौ लै मुरली प्यारौ,जै ही छबि नैनन माही बसाई।
पाय परत करै प्यारी जोरि बिनती,आय मिलौ काय देरि लगाई।

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