मोहे दर्शनः दो गिरधारी

मौहे दरशन दो गिरधारी।
तौरो ना आस की डोर साँवरौ,तौरो प्रीत ना अपनी म्हारी।
साँचै करौ नाही कहै बैन जगकै,साँची किजौ मन कही बनवारी।
बहौत रही अब नाय रह्यौ जावै,सुनि नैनन जावौ जी पधारी।
बिनु तुम अपना ओर ना कोऊ,"प्यारी" कैसो कोउ ओर पुकारी।

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