परै लिपटै

परै लिपटै दोउ बात बहाने।
सहम द्युति कबहु ढुरै जावै,कबहु अलिन डर उर लिपटाने।
देत खग दाना कबहु डरपै,डरपेई माल भुज पिय पहिनाने।
जब बदरा सुनि भीतै प्यारी,हित ढांढस पिय हिय सौ लगाने।
बात बात दोउ गाढे लिपटै,"प्यारी" लिपटे सदाई दरशन चाहने।

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