तरस गए प्राण अब तो
तरस गए प्राण अब तौ भतेरै,दरस दिखावौ रमणा जु।
मारग दीखै नाय मिलन हु तरसै,मिलनौ सुझावौ रमणा जु।
रीत नेह जग झंझट झूठै तै,मोय बचावौ रमणा जु।
पिंजरौ परयौ बड्यौ दिन प्राण पंछी,खोल उडावौ रमणा जु।
मानौ अरज याए मानौ जे गरजा,निजमै मिलावौ रमणा जु।
जनम अनत "प्यारी"मिलन कौ तरसी,अबिकै लै-जावौ रमणा जु।
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