मधुरातिमधुर

मधुरातिमधुर
मधुरातीमधुर राधा नाम।
शुक सनकादिक गावत,पावन करै जिव्हा।
इच्छित वर पावत,चरण कमल सेव्या।
इनकेई रज भाल,लगावत सिद्ध ध्यानी।
चरन पलोटत इनकेई,श्यामसुन्दर मुनी ग्यानी।
रटत नाम कटिहै,जनम मरण को फंद।
हिय मुदित हौवै,सब निश्चय मैटे द्वंद।
शिव ब्रह्मादि गावत,जाकी वाणी पार न पावै।

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