पैये कोमल गेह भूषण
,क्षमा,पूर्व मे ही अपनी धृष्टता हेतू🙏🙏🙏
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पैये कौमल गेह भूषण अति भारी।
कौन श्रृंगारण वारौ ऐसौ,दैय होय अधीर उर गारी।
नवनीत-सो गात हार सजात,अरू जाय तापै बलिहारी।
अधरनि धारै रहै मंद-मुस्क्यन,कोय बात करै ना बिचारी।
जानि साजति तोहैहु भावति,ताई दयी भुलाई सुकुमारी।
याए होय ऐहि हम सम हितेही,सुख देन सजै ह्यौ बिहारी।
जानत तौहरै मन के भौरे,कहा करि देउ सुख हित प्यारी।
"प्यारी" सुनिहौ इन्हु तजिहौ,धारौ बनै भूषण फूलवारी।
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