अलबेले दोऊ उरझे

अलबेलै दोउ अरूझै दृग डोर।
प्रीत पतंग बंधी दृग डोरि,रासाकाश उडि गई अति घोर।
हृदय चरख छूटै लिपटावै,अरूझाए दए चहै नेक ओर।
काटन कटन ना होर न कोउ,दोउ ऊँचेई ऊँचै उडावन होर।
सखियन लूटत कटत गिरत जई,नित "प्यारी" लूटत दरस नकोर।

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