निरख लयी जोरी

निरख लयी जोरी
अहो! निरख लयी जोरी।
घन दामिनी संग बिलसै,दुई संग बिलसत ज्योही।
कुमुदिनी भ्रमर ज्यौ उडिहै,पीबत रस मुदित भराही।
गगन रैन ज्यौ चंद्र चमकत,रैन करत मनुहार चंदा ही।
छबी फबी पीत साँवली,ऐकेहु मिलित है हौहि।
प्यारी सुनत लिखत बहु बारी,दरस कदसि कराही।

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