अक्रूर भयो
अक्रूर भयौ
क्रूर,अक्रूर भयो काहै।
प्रेम सो हम पिय संग ठाडी थी,काहे लेऔ संग धाये।
कुंज उपवन तैने सबहि उजाडै,हिय सबरे दये मुरझाये।
जग सौ पाप सबहि मा भारी,पिय प्रिया विछोह कराये।
हमसौ रै कौन बैर निकारौ,पिय संग ले जाये।
अबहि समय तू लौट जा बौरे,नाय जीवत हमे जराय।
हाय सो हमरी जर जावेगौ,तू बात सुनत नाय काय।
पाम पकर करू बिनती काका,प्यारी कान्हा नाय ले जाय।
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