प्रेम को फंदा
प्रेम को फंदा
मन फस्यौ प्रेम के फंदा सो,जग प्रीत के फंद सबहि कटे।
हिय भावै जुगल किशोर मेरौ,नेह ओरन सो अबहि हटे।
रूप राशी पियै शशी को ही,हमहु चंदा को चकोर भये।
गहे लाल लली को चरणन ही,कोउ ओर को चरण गहै न गहै।
उरझ्ये चित्त डोर युगल सो ही,कोउ ओरन हियहि नाही बसै।
दासी रखिहो निज चरणन को,प्यारी ओर सो नेह नाही च्हयै।
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