निरखै लली लाल

निरखै लली मै लाल आपई।
प्रति भूषण जड़ित मणिक में,दैखे करै यौ अंगनि सबई।
कपोल ग्रीवा नैनन भुज पाए,अरूण अधर दैखे आपनौ तबई।
चकित तृषित रस आतुर होए,पीवन झुकै रस प्यारी कै मुखई।
पिय प्यारी पै प्यारी झुकी सैंज पै,गयौ रस उमगौ परौ भरई।
अरस-परस रस बहुतई किन्है,"प्यारी" रस दरस करते हसई।

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