जुगलजु लिखावै

जुगलजु लिखावै

अटपटि लटपटि बाणी कहा लिखिहै,लिखिहै सोई जो जुगलजु लिखावै है।
कहिहै कौन कौन जानिहै ऐहै,जानिहै सोई जाकु जै जै जु जनावै है।
नैन ना बहावै नाय दीन हौहिहै,काहै न तबहु हिय द्रवित हुहि जाहै है।
तबहु कृपामयी जुगल बिनु सौचिहै,बिनु कारज कृपाहि बरसावै है।
बिनु कारज अभिमान मान करिहै,मौ सम अधम नाहि रसिक कहावै है।

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