धीरे-धीरे रे मना धीरज धर सब होय।

धीरे-धीरे रे मना धीरज धर सब होय।
आँच समय जई भजन पकै "प्यारी" रस अति गाढित पोय।।1।।  

बूँद सौ सिँधु घटै नाहि पर बूँद सौ घट भरि जाय।
"प्यारी" भाँति ऐहि रस जोरि सौ रसिकन रस है पाय।।2।।

छन आध जो रस मै डूबि गयौ नाहि पुनि निकरनौ मारग।
"प्यारी" ज्यो कुसुम सुगन्धि एक हो सोई रस सौ हौवे रस धारक।।3।।

दैवे जोई रस सैवे है याकि "प्यारी" को चिंता नाही।
भजन करै सब छाडि कै हित सखी सौ शिक्छा पाही।।4।।

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