ब्रज ठकुरानी हे रसरानी

ब्रज ठकुरानी हे रसरानी,काहे मौहे दी ठुकराय।
काढि महल ते सेवाहु ते,दीन्ही ब्रज सौ दुराय।
जानू अधमहु मंद-मतिहु,तऊ उर सेवाहु ललचाए।
करूणा तिहारी पै बलिहारी,बल याकै बलि कहाए।
अंचरा पसारू सुख-तौ संवारू,"प्यारी" मांगे नैन झुकाए।

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