पायो पिय री सखी मैं ऐसो

पायौ, पिय री सखी मै ऐसौ।
नैननि लखी निश्छलता अरी,तकत थकै कोय केसौ।
खिलित मधुर अधरनि हाँसि,घुली गयौ मिसरी जेसौ।
अंगुरिन कछु सुघरता सोहि,है एक एक मुरली वेसौ।
चरण कहु सुंदरतई कहा,दए गुलाब अर्घ रवि तेसौ।
फिरी अबलौ ढूंढती दूजेई,मे"प्यारी" कहु ना पिय ऐसौ।

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