मोरि एक सुनो नेक भानु की बेटी।

मोरि एक सुनो नेक भानु की बेटी।
छाडि जगत कुंजन बसि जावू,सेवा टहल महल हित रहू सदा हेठी।
झाकि लता तरू ओटन देखू,करू झाँकी संग लाल गाढी लिपटी लेटी।
सैनन सखी बीरी मुखई राखू,लैवू तृण तोरि जोरि बला सब मेटी।
दैत दुहाई करै "प्यारी" बिनती,राखौ कुंजनि कर कछु लता खग चेटी।

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