खिली कनक कुमुदिनी

खिली कनक कुमुदिनी ब्रज सर ऐ री।
सरस सुवास मधुर रस धरै वपु,नाय उपमा उपमेय हु जान परै री।
दृगन वृहत चपला द्रुत गति अति,पलहु ना टिकत ठौर ओर एकहु री।
ललित ऐसौ रूप नैन परै ढुरिकै,"प्यारी" लख्यौ ना जाय पल छन एकटक री।

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