म्हारे प्यारे रमणा

म्हारै प्यारे रमणा म्हारै बनि रहियौ।
शत लख कोटि आवै जग वारै,जितहु तौ ठाडै तित बनै रहियौ।
रूप ठगौरि तौरि कबहु ना उतरै,जग जितनौ चहै रंग डारै जइयौ।
ओर द्वार मोय काढियो कदि ना,निज द्वार मारि चहै ठोकर रखियौ।
श्वास श्वास करे " प्यारी " योई अरजी,बेगि आय पिय मोय लई जइयौ।

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