प्रेम विहग बैठे डाली डाली

प्रेम विहग बैठे देखे डाली।
नैन फसे करते रस बतिया,हसे अधर बढ़ी अंग लाली।
पग लटकै कर पकरै ऐकौ,कर पकर रहै एक डाली।
लगे बोलनि बोल कोकिल जैसों,देखि कूकती केकी तरू काली।
बढ़ा प्रेम लिपटै तरू बैठे,"प्यारी" तरू पै देखि रस केली।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया