दोउ अलबेले करे रंग केलि।

दोउ अलबेले करे रंग केलि।
पौढे सेज सुधै प्यारै,बैठी निकट ही प्यारी अलबेली।
खैच प्यारी उर गिराई,अधर पिवन की प्यास उर खेली।
अंगुरि धरी अधर रोकै,रौके प्यारी बनिकै हठिली।
नैन नैन मनावै प्यारी,मनावै पिय कसै भुज रसीली।
नितही दीजौ दरश ऐसे,"प्यारी" गावै योई रस केलि।

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