कनक लता सी

कनक लता सी प्यारी।
लिपटी रहत सदा उर प्रीतम,दै गल बैय्या डारी।
रसिकनी रस मे रहे सदा डूबी,रहे संगै डूबे बिहारी।
बाढे करेई रस केलि परस्पर,सुख पिय के बलिहारी।
पिय मूल पिय फल फुलई,पिय सरबस भए "प्यारी"।

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