रह्यौ गयो कारौ

रह्यै गयौ कारौ
कारौ रे कारौ रह्यै गयौ कारौ।
राह मिली गोपीन कसी ताने,कहा भयी नेक कारो बता तो।
माखन चुराय म्हानौ बड्यौ दिना बीते,अबहु रह्यौ तौ कारौ कौ कारौ।
तेरौ माई बाबा नाय रै कारै,अरू भाई दाउ तैरौ गौरै गौरै।
तैने मोल लाई माई तेरी,तबहु कारौ भयौ तू औ भौरै।
सुनी गोपीन बड्यौ लाल लजायौ,मारै कोप पड्यौ ढैला ठायौ।
मारी फौड दयी सबन की मटकी,दूध दही सबन को बिखरायौ।
कही छौरी अहीर की तैने ऐसी,नाय छोडू करि दउ ऐसी तैसी।
प्यारी कदसै निहारै राह,आवो साँवरौ करन म्हारी ऐसी वैसी।

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