बलिहार
बलिहार
बलि बलि जावे श्याम लला गोपी।
पलनौ पड्यौ लाला श्याम सजीलौ,लेवन आयी सखी बलिहार।
घेर लई सखी चहु ओर सौ,लेवे माई सौ न्यौछार।
ठिठकी ठाडी देखि रहि गयी,एकहु बेरि छबी लीन्ही निहार।
कोऊ तौ अटकी नैन कजरारै,कोउ कौ नैन चरणा लगार।
मुख पुरण निरख नाय पयी,इक इक अंग दीन्ही सुधि बिसार।
लला तेरौ माई जुग जुग जीवै,रहवै मंगल सदा तेरौ द्वार।
शीश देन वारौ शीश दैवती,प्यारी जयी बली लीला न्यार।
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