हो तुम वसंत विरह के शूल

हो तुम वसंत विरह के शूल.....
*
विदग्ध हृदय जलती ज्यो होली,शर सभी रंग रंग के फूल।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
*
अतिरेक सुहास सुवास सुगंधि,रह रह दिलाती स्मरण कूल।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
*
हरित वर्ण चंहु ओरि प्रसरित,नील पीत आभा हरि मिलित ज्यू।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
*
शीतल वो मंद समीर स्पर्श,करा-वलियाँ उनकी देती ज्यू छू।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
*
रंगहीन जीवन मे अब "प्यारी" ,है बस इन्ही यादो की धूल।

है बस इन्ही यादो की धूल।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
हो तुम वसंत विरह के शूल.....

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया