हो तुम वसंत विरह के शूल
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
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विदग्ध हृदय जलती ज्यो होली,शर सभी रंग रंग के फूल।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
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अतिरेक सुहास सुवास सुगंधि,रह रह दिलाती स्मरण कूल।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
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हरित वर्ण चंहु ओरि प्रसरित,नील पीत आभा हरि मिलित ज्यू।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
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शीतल वो मंद समीर स्पर्श,करा-वलियाँ उनकी देती ज्यू छू।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
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रंगहीन जीवन मे अब "प्यारी" ,है बस इन्ही यादो की धूल।
है बस इन्ही यादो की धूल।
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
हो तुम वसंत विरह के शूल.....
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