जुगल चरण द्युति पिय प्यारी की।
जुगल चरण द्युति पिय प्यारी की।
अनगिन चंदा भानु अनेका,फिकी चमक द्युति नभ वारी की।
पन्ना मणिक रतन सागर कै,हारी सबकी चमक इन बलिहारी की।
अगिन कनक जगत सारो के,उपमा ना अणु भर जोरि न्यारी की।
ह्रदय धारि अपलक निहारू,ओर चाह नाय कोउ "प्यारी" की।
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