रस बौरे पिय करै उल्टे पलटे काज

रस बौरे पिय करै उलट-पट काज।
पहिराई दुई पायल प्यारी,दीन्ही पहिराए प्यारी संग निजहु की आज।
दरशन रस लौभा अधिकाई ,  छूवन पद देर हित करै यौ साज।
चलत भौरई उतरत सैजा ,   हाँसै सखी जान पिय मन कै राज।
विविध रंगीलै करते लीला , दैखत "प्यारी" कुंज सहज कदि भाज।

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