धारै दोऊ अद्भुत रँग सिंगार

धारै दोउ अद्भुत रंग सिंगार।
सूचक रति रैन रस बरणत,बतावै गई रैन बीती हित प्यार।
घेर-दार कुरता तंग सी सुतनी,ता पै ओढी औढनी प्यारी सम्हार।
कंचुकी लहंगा धारै पिय देखी,रहै पट अंसनि प्यारौ धार।
भास ना नेकहु ऐसौ सिंगार कौ,चले अति सहजई आपस निसार।
"प्यारी" सुख बूटी दरश रंगीलै,परम सुख जोरि लडैति विहार।

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