कौन सुने हम सौं दुर्बल की
कौन सुनै हम सौ दुर्बल की।
सुनि जग नाथ धारि शत हाथ,देय ढाढस तपत जीव बिश्वास,बारि म्हारी गए पलटि जी।
बंधै सुनि नुपुर चैटी पग दुर,सुनै राजति राज बसै निज धाम,काय म्हारी अब लौ सुनी नी।
भरै परै पुरान कहि करूणा निधान,धन धन कहि गिरा वीणा तान,नैन लखै यौ हमतौ कबहु नी।
नाय देव धाम मन इच्छ काम,पाप पुन कौ बात करै ना,ह्यौ कौ उनपै वार धरै जि।
नाय अति देओ सुनि अरज लेओ,"प्यारी" हिय सौ तन सौप देऔ,जोई भरिकै सौह तजी दी।
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